चंडीगढ भारत का नवीनतम शहर है

» जिसकी योजना फ्रांस के प्रसिद्ध वास्तुविद्‌ ली कारबूजियर द्वारा बनाई गई।

» यह पंजाब एवं हरियाणा राज्य की राजधानी है

» परन्तु यह दोनों राज्यों में से किसी से भी संबंधित नहीं है। बल्कि यह-एक केन्द्र शासित प्रदेश है।

इसका तात्पर्य है कि यह नगर प्रत्यक्ष रूप से भारत सरकार के प्रशासनाधीन है और इस नगर का गठन एक ऐसे राज्य के रूप में नहीं हुआ जिसकी अपनी विधान सभा हो। भारत में केन्द्र शासित प्रदेश का तात्पर्य है जैसे संयुक्त राज्य अमरीका में कोलम्बिया का जिला।


रॉ क गार्डन (शिला उद्यान)

 

यह एक अनोखा मूर्तिकला का उद्यान है, जिसमें शहर के विश्व प्रसिद्ध कलाकार नेक चन्द की कला कारी लगभग 64 एकड भूमि पर फैली हुई है यहाँ आने वाले को पगडंडियों की भूल-भूलैया, कोठरियों एवं घाटियों से होकर गुजरना होता है जो कि आने वाले को एक कल्पना लोक की झल्ली प्रस्तुत करते हैं। पहली बार रॉक गार्डन को आम जनता के लिए 1976 में खोला गया था तब से अब तक इस उद्यान ने आने वाले करोड़ों लोगों का मन केवल अपने अनोखे दृश्यों से मोहित किया है अपितु अपने अनोखो इतिहास के कारण भी आश्चर्यचकित किया है। नेक चन्द शहर के सार्वजनिक विभाग में सड़क निरीक्षक के पद पर आसीन थे जब उन्होंने बेकार पडी भवन निर्माण सामग्री के ढेर को रूपांतरित करना आरंभ किया।
उन्होंने उद्यान एक-एक गुप्त रहस्य के रूप में रखा-- उन्होंने कभी ऐसा सोचा भी न था कि एक दिन आलोचक उनके अनोखे कार्य की पं्रशसा करेंगे और उसे पेरिस के आधुनिक कला संग्रहालय में तथा विश्व के अन्य शहरों में प्रदर्शित करेंगे। रॉक गार्डन का पहला चरण एक छोटी घाटी है-- जो कुछ हद तक प्राकृतिक होते हुए भी विलक्षण चट्‌टाने का रूप है और कुछ टूटी हुई चीनी मिट्‌टी के टुकडों, पत्थरों और व्यर्थ कोयले का सम्मिश्रण है। यक एक ऐसी जगह प्रतीत होती है मानो यहाँ देवों के टुकड़ों एवं कांच से बनाई गई है। प्रत्येक कृति अपने आपे में भिन्न है। दूसरे चरण में एक पहाड़ी ग्राम का दृश्य है जो झरने के किनारे बसा हुआ है। इस ग्राम के निवासी कुछ सीधे-सादे तथा कुलीन-प्रतीत होते हैं।
Ch CRG 10

सुखना झील

 

यह मानव निर्मित झील शहर की उत्तर सीमा पर करीब 3 वर्ग कि.मी. के क्षेत्र में फैली हुई है। पार्क के प्रवेशद्वार पर कारबूजियर का झील विषय में लेख पढ़ने को मिलता है।'' चंड़ीगढ के संस्थापकों ने यह झील एवं बांध नवीन शहर के वासियों को उपहार स्वरूप दिया है जिससे वे शहर आपा-धापी भरी जिन्दगी से आराम पा सकें और प्राकृतिक सौन्दर्य का शांति एवं खामोशी से आनन्द उठा सकें'' झील के चारों ओर फैली वृृक्षों आच्छादित सैरगाह टहलने का मनपसन्द स्थल है यहाँ शांतिमय वातावरण का आनन्द उठाया जा सकता है। यहाँ पैडल वाली नावों में नौका विहार भी मनोरंजन किया जा सकता है-- या फिर चंडीगढ पर्यटन विकास निगम द्वारा संचालित कैफे में भी विश्राम किया जा सकता है।
झील एवं वृक्षों से आच्छादित इसके तट एक राष्ट्रीय संरक्षित नम भूमि है। यह पक्षी दर्शकों का मनपसन्द स्थल है। दिसम्बर से लेकर फरवरी तक यहाँ पर पक्षियों की कई स्थानीय जातियों के अलावा मध्य एश्यिा एवं साइबेरिया से आने वाले जलीय पक्षियों की कई जातियां देखी जा सकती है बाहर से आने वाले इन पक्षियों को शीतकाल बीताने क लिए झील का क्षेत्र ही भाता है। झील से सन्‌ 1989 के वर्ष में बनाया गया गहरा जल क्षेत्र भी जहाँ पर 1989 में इस शहर द्वारा एशिया तैराकी चैम्पियनशिप प्रतिस्पर्धा का आयोजन किया गया था।
Sukhna Lake Chandigarh

जाकर रोज गार्डन/गुलाब उद्यान

इस उद्यान का नाम भारत के राष्ट्रपति श्री जाकिर हुसैन के नाम पर रखा गया। इस उद्यान की स्थाना 1967 में चंडीगढ के प्रथम मुखय आयुष डॉ. एम.एस. रंधावा के निर्देशन में की गई। यह एशिया का विशालतम उद्यान है जो 27 एकड के क्षेत्र में फैला हुआ है और इसमें 17,000 अधिक पौधे हैं जिनमे करीब 1,600 किस्मों के गुलाब लगे हैं। यहाँ अनेक फव्वारे भी है। यह उद्यान वार्षिक गुलाब महोत्सव का आयोजन स्थी भी है । यह एक एक ऐसा आयोजन है जिसे राष्ट्रीय मेलों एवं उत्सवों की सूची में भी स्थान दिया गया है। यह शहर के मुखय सांस्कृतिक आयोजनों में से एक है, हजारों आने वाले व्यक्तियों को अपनी ओर आकर्षित करता है।
chandigarh rose garden

कसौली

चंडीगढ से 77 कि.मी. की दूरी पर
यह एक ऐसा पर्वतीय स्थल है जो अपने नित नूतन आकर्षण और नैसार्गिक सौन्दर्य के लिए प्रसिद्ध है। रात्रि में चंडीगढ शहर में जलने वा रोशनी का यहाँ से देखने पर मनोहारी दृश्य होता है। कई प्रतिष्ठित पब्लिक स्कूल कसौली के पास स्थित है।

चैल

चंडीगढ से 107 कि.मी. की दूरी पर
इसका निर्माण पटियाला के महाराजाने ग्रीष्मकालीन महल के रूप में किया था। वर्तमान में चैल एक आलीशन होटल है। चैल मे विश्व उच्चतम क्रिकेट-पिच के साथ-साथ पर्वतों के उत्कृष्ट दृश्य देखन को मिलते है।

शिमला

चंडीगढ से 107 कि.मी. दूर
यह इधर-उधर फैला हुआ पर्वतीय नगर, जो अब हिमाचल प्रदेश की राजधानी है, अंग्रेजों की भारत की ग्रीष्म्कालीन राजधानी थी। उत्कृष्ट बस-सेवा के कारण यहाँ चंडीगढ से सरलता से पहुंचा जा सकता है अथवा यहाँ पहुँचने के लिए मीटर गेज रेल द्वारा भी यात्रा की जा सकती है शिमला के मुखय आकर्षणों में यहाँ की माल एवं पहाडी की चोटी (रिज), कई भव्य प्राचीन इमारतें जिनमें वाइस रीगल लॉल (जो अब उच्च् शिक्षा का संस्थान है), अन्नाडेल जाखू मंदिर जहाँ बंदरों के झुण्ड होते हैं, घने वृक्षों से आच्छादित घाटी और चाद्‌विक झरना, मैदान तथा तिब्बत बाज शमिल है। यह एक प्रमुख पर्यटक स्थल है और यहाँ रहने के लिए पर्याप्त स्थान एवं यात्रा की सुविधाएं उपलब्ध है।